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जनपद सीतापुर की तहसील सिधौली के अंतर्गत ग्राम बनियानी, पोस्ट सर्वा में वर्षों से मनाई जा रही डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती इस बार प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण विवाद का विषय बन गई है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1993 से लगातार गांव में अंबेडकर जयंती का आयोजन होता आ रहा है, जिसका पंजीकरण डेटा संख्या 509 के अंतर्गत दर्ज है। हर वर्ष की भांति इस बार भी गांव के लोग बाबा साहेब की जयंती मनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ अंबेडकर विरोधी मानसिकता रखने वाले लोग प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं, जिसके चलते इस परंपरागत आयोजन को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। वर्षों से शांति और सौहार्द के साथ यह जयंती मनाई जाती रही है, जिसमें किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है। स्थानीय नागरिकों ने यह भी बताया कि केंद्र और राज्य सरकार, विशेषकर भाजपा सरकार, सार्वजनिक रूप से यह कहती रही है कि जहां-जहां बाबा साहेब की प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां उनके कार्यकर्ता जयंती कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान दें और समाज में जागरूकता फैलाएं। ऐसे में बनियानी गांव में प्रशासन द्वारा अनुमति न देना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के कथनों और जमीनी हकीकत में अंतर साफ नजर आ रहा है।

बनियानी गांव में वर्षों पुरानी डॉ. अंबेडकर जयंती पर अनुमति को लेकर विवाद

IMG 20260427 WA0239 IMG 20260427 WA0238रिपोर्टर विनोद कुमार 

शीर्षक: बनियानी गांव में वर्षों पुरानी डॉ. अंबेडकर जयंती पर अनुमति को लेकर विवाद

जनपद सीतापुर की तहसील सिधौली के अंतर्गत ग्राम बनियानी, पोस्ट सर्वा में वर्षों से मनाई जा रही डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती इस बार प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण विवाद का विषय बन गई है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1993 से लगातार गांव में अंबेडकर जयंती का आयोजन होता आ रहा है, जिसका पंजीकरण डेटा संख्या 509 के अंतर्गत दर्ज है। हर वर्ष की भांति इस बार भी गांव के लोग बाबा साहेब की जयंती मनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति देने से इनकार कर दिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ अंबेडकर विरोधी मानसिकता रखने वाले लोग प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं, जिसके चलते इस परंपरागत आयोजन को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। वर्षों से शांति और सौहार्द के साथ यह जयंती मनाई जाती रही है, जिसमें किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों ने यह भी बताया कि केंद्र और राज्य सरकार, विशेषकर भाजपा सरकार, सार्वजनिक रूप से यह कहती रही है कि जहां-जहां बाबा साहेब की प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां उनके कार्यकर्ता जयंती कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान दें और समाज में जागरूकता फैलाएं। ऐसे में बनियानी गांव में प्रशासन द्वारा अनुमति न देना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के कथनों और जमीनी हकीकत में अंतर साफ नजर आ रहा है।

गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने प्रशासन से मांग की है कि वे निष्पक्ष जांच करें और किसी के दबाव में आए बिना इस परंपरागत कार्यक्रम को अनुमति दें। उनका कहना है कि यह आयोजन संविधान निर्माता के सम्मान में होता है, जिन्होंने देश को समानता और न्याय का अधिकार दिया। ऐसे महान व्यक्तित्व की जयंती को रोकना समाज में गलत संदेश देता है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें अनुमति नहीं दी गई तो वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगे और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाएंगे। उनका कहना है कि वे किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपने अधिकारों से पीछे भी नहीं हटेंगे।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या वर्षों पुरानी इस परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी जाती है या नहीं।

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